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Saturday, 9 July 2016

What Is Essay Of Enviornment Pollution In Hindi: पर्यावरण प्रदूषण क्या हैं? हिन्दी में सिखीये..

                   "पर्यावरण प्रदूषण: समस्या और निदान"
1.प्रस्तावना:-
प्रदूषण का अर्थ:-
                  प्रदूषण पर्यावरण में फेल कर उसे प्रदूषित बनाता है, और इसका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर उल्टा पड़ता है, इसलिए हमारे आसपास की बाहरी परिस्थितियां जिनमें वायु जल भोजन और सामाजिक परिस्थितिया आती हैं, वह हमारे ऊपर अपना प्रभाव डालती है, प्रदूषण एक अवांछनीय परिवर्तन है, जो वायु जल भोजन इस साल के भौतिक रासायनिक और जैविक गुणों पर विरोधी प्रभाव डाल कर उनको मनुष्य व अन्य प्राणियों के लिए हानिकारक एवं अनुपयोगी बना डालता है, कहने का तात्पर्य यह है- कि जीव धारियों के समग्र विकास के लिए और जीवन क्रम को व्यवस्थित करने के लिए वातावरण को शुद्ध बनाए रखना परम आवश्यक है, इस  शुद्ध और संतुलित वातावरण में  उपयुक्त घटकों की मात्रा निश्चित होनी चाहिए अगर यह जल वायु भोजन आदि सामाजिक परिस्थितियां आपने असंतुलित रूप में होती है एवं उनके मात्रा में कमी या अधिकता होती है जिससे कि वातावरण प्रदूषित हो जाता है एवं जीव धारियों के लिए किसी ना किसी रुप में यह हानिकारक होता है, इसे ही प्रदूषण कहा जाता है|

 2.प्रदूषण के विभिन्न प्रकार:-
जल प्रदूषण :-
             जल के बिना कोई भी जीवधारी, पेड़, पौधे जीवित नहीं रह सकते हैं|इस जल में भिन्न-भिन्न खनिज तत्व, कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ तथा गैसें घुली रहती हैं, जो एक विशेष अनुपात में होती है, तो यह सभी के लिए लाभकारी होती है| लेकिन जब इन की मात्रा अनुपात से अधिक हो जाती है; तो जल प्रदूषण हो जाता है और हानिकारक भी बन जाता है| जल प्रदूषण के कारण अनेक रोग पैदा करने वाले जीवाणु, वायरस औद्योगिक संस्थानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ, कार्बनिक पदार्थ, रासायनिक खाद आदि हैं| एवं जलाशय में मौजूद मछली आदि जीव मरने लगते हैं ऐसे प्रदूषित जल से टाइफाइड, पेचिस, पीलिया, मलेरिया इत्यादि अनेक रोग फैल जाते हैं| हमारे देश के अनेक शहरों को पेयजल निकटवर्ती नदियों से पहुंचाया जाता है, और उन्ही नदी में आकर शहर के गंदे नाले, कारखानों का बेकार पदार्थ, कचरा जाता है, जो पूर्ण नदियों के जल को प्रदूषित बना देता है|

ध्वनि प्रदूषण:-
               प्रदूषण से मनुष्य की सुनने की शक्ति कम हो रही है, उसकी नींद बाधित हो रही है, जिससे नींद ना आने के रोग उत्पन्न हो रहे हैं| मोटर, कार, बस, ट्रैक्टर, लाउडस्पीकर बैंड बाजे और मशीनें अपनी ध्वनि से संपूर्ण पर्यावरण को प्रदूषित बना रहे हैं| इससे छोटे-छोटे कीटाणु नष्ट हो रहे हैं, और बहुत से पदार्थों का प्राप्त प्राकृतिक स्वरूप भी नष्ट हो रहा है| ध्वनि प्रदूषण के कारण कई तरह के रोग मानव जाति के घटक बनते हैं, जैसे बहरापन, ऊंचा सुनना, मानसिक तनाव, चिढ़चिढ़ापन, सिरदर्द, और गर्भवती महिलाओं को भी यह नुकसान पहुंचाता हैं|

वायु प्रदूषण:-
              वायुमंडल में गैस एक निश्चित अनुपात में मिश्रित होती है, और जीव धारियों अपनी क्रियाओं तथा समाज के द्वारा आँक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाए रखते हैं| परंतु आज मनुष्य अज्ञान वर्ष आवश्यकता के नाम पर इन सभी के संतुलन को नष्ट कर रहा है| आवश्यकता दिखाकर वह वनों को काट रहा है| जिससे वातावरण में ऑआँक्सीजन कम होती जा रही, मीलों की चिमनियों में से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड, क्लोराइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि भिन्न-भिन्न गैसें हैं, जो वातावरण में बढ़ रही है| वह विभिन्न प्रकार के प्रभाव मानव शरीर पर ही नहीं वस्त्र, धातुएं तथा इमारतों पर भी डालती है| यह प्रदूषण फेफड़ों में कैंसर, अस्थमा के रोग, हृदय संबंधी रोग, आंखों के रोग, मोहासे इत्यादि रोग फैलाते हैं|

रेडियोधर्मी प्रदूषण:-
                     परमाणु शक्ति उत्पादन केंद्र और परमाणु परीक्षणों से जलवायु तथा पृथ्वी का संपूर्ण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, और वह वर्तमान पीढ़ी को ही नहीं बल्कि भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए भी हानिकारक सिद्ध हुआ है,  जिससे धातुएं पिघल रही है और वह वायु में  फेल कर उसके झोंकों के साथ संपूर्ण विश्व में पर्याप्त व्याप्त हो जाते हैं| तथा भिन्न भिन्न रोगों से लोगों को  ग्रसित बना देती  है|

रासायनिक प्रदूषण:-
                       आज कृषक अपनी कृषि की पैदावार बढ़ाने के लिए अनेक प्रकार के रासायनिक खादों का कीटनाशक और रोगनाशक दवाइयों का प्रयोग कर रहा है, जिससे वर्षा के समय इन खेतों से बहकर आने वाला जल नदियों समुद्रों में पहुंचकर भिन्न भिन्न जीवो के ऊपर घातक प्रभाव डाल रहा है| और उनके शारीरिक विकास पर भी इसका दुष्परिणाम दिखाई दे रहा है|

3.प्रदूषण की समस्या का समाधान:-
                                        पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पिछले कई वर्षों से इस देश भर में प्रयास किया जा रहा है, आज उद्योगीकरण ने इस प्रदूषण की समस्या को अति गंभीर बना दिया है| यह औद्योगिकरण तथा जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न प्रदूषण को व्यक्तिगत और शासकीय दोनों ही स्तर पर रोकने के प्रयास आवश्यक है| भारत सरकार ने सन् 1974 ईसवी में जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम लागू कर दिया था, जिसके अंतर्गत प्रदूषण को रोकने के लिए कई योजनाएं बनाई गई|
                                        सबसे महत्वपूर्ण उपाय प्रदूषण को रोकने का है, वनों का संरक्षण साथ ही नहीं वृक्ष का रोपण तथा उनका विकास करना, जनसामान्य में वृक्षारोपण की प्रेरणा दि जानी चाहिए, इत्यादि प्रदूषण की रोकथाम में सरकारी कदम है| इस बढ़ते हुए प्रदूषण के निवारण के लिए सभी लोगों में जागृति पैदा करना भी महत्वपूर्ण कदम है| जिससे जानकारी प्राप्त कर उस प्रदूषण को दूर करने के संबंधित प्रयास किए जा सकते हैं, कई नगरों और गांव में स्वच्छता बनाए रखने के लिए सही प्रयास किए जाएं, बढ़ती हुई आबादी के निवास के लिए समुचित और सुनियोजित भवन निर्माण की योजना प्रस्तावित की जाए|

 4.उपसंहार:-
            इस तरह सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के द्वारा पर्यावरण की विशुध्दि के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे, तब ही मानव समाज वेद वाक्य की अवधारणा को विकसित करके सभी जीव मात्र के सुख समृद्धि की कामना कर सकते हैं|
               
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Wednesday, 6 July 2016

What Is Essay Of Corruption In Hindi:भ्रष्टाचार का निबंध क्या हैं? हिन्दी में सिखीये:

                              भ्रष्टाचार का निबंध
"भ्रष्टाचार आज के समाज का एक प्रमुख रोग है, आज इस रोग से लगभग पूरी दुनिया त्रस्त है, भारत भी इस रोग से अछूता नहीं है"

1.प्रस्तावना:-
           भ्रष्टाचार दो शब्दों से मिलकर बना है,           भ्रष्ट+आचारण़
 भ्रष्ट का अर्थ है- 'बिगड़ा हुआ' और आचरण का अर्थ है- 'व्यर्थ और आचरण,' आचरण की संहिता सभी धर्मों में स्वीकार की गई है, हमारी भारतीय संस्कृति में आचरण को अत्यधिक माना गया है, वेदों, उपनिषद, गीता, और रामायण की बात छोड़ दी जाए, तो भी कबीर जैसे बिना पढ़े लिखे संत ने भी आचरण पर काफी बल दिया-

 "ऊंचे कुल क्या जननियाँ, जो करणी ऊंची ना होई| सोवन कलस सुरै भरया, साधुँ विद्या सोई||"

ईशा ने कहा:-
              सुई के छेद से ऊंट पार हो सकता है, लेकिन धनवान स्वर्ग नहीं जा सकता, इसका आशय यह है कि आचरण विहीन व्यक्ति स्वर्ग का अधिकारी नहीं है|

इस्लाम कहता है:-
                     मुस्लिम है जिसका आचरण वही है मुसलमान, इस तरह आचरण की महत्ता तो सभी ने स्वीकार की लेकिन राष्ट्र की महत्ता को किसी ने स्वीकार नहीं किया है, जो आचरण बिगड़ा हुआ हो, नीति, न्याय, धर्म और सामाजिक, नैतिक मूल्यों के विपरीत हो, शासकीय नियमों के विरुद्ध हो उसी के भ्रष्टाचार कहा जाएगा| इस तरह भ्रष्टाचार भस्मासुर की तरह है जो जीवन के हर पहलू को छू रहा है, आज हमारे देश का सारा जीवन आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है, आज राजनीति में तो संत्री, मंत्री यहां तक की प्रधानमंत्री भी भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुके हैं, सारे कार्यालय, चपरासी से लेकर पदाधिकारी इस दल दल में डूब ही चुके हैं, जिस तरह देश में गरीबी और महंगाई रग-रग में समाई हुई है, उसी तरह भ्रष्टाचार भी रग-रग में समाया हुआ है|

2.भ्रष्टाचार का आरंभ:-
                       भ्रष्टाचार का आरंभ कब और कैसे हुआ? यह बता पाना कठिन है, परंतु भारत में इस रोग को अंग्रेजो ने सर सीमा तक पहुंचा दिया, भारत में अंग्रेजी राज स्थापित करने वाला 'क्लाइव' जब यहां आया तो बहुत साधारण व्यक्ति था| परंतु जब वह लौटकर इंग्लैंड गया, तो करोड़ों रुपए की पूंजी उसके पास थी, इंग्लैंड में किसी युवक की भारत में नियुक्ति सौभाग्य की बात समझी जाती थी और ऐसी नौकरी पाने के लिए लोग बड़ी-बड़ी रिश्वत देते थे, इसका नतीजा यह हुआ कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हुआ|

3.भ्रष्टाचार के रूप:-
                       जिस तरह माया के अनेक रुप है, उसी प्रकार भ्रष्टाचार के भी अनेक रूप है, आज यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्याप्त है|
जैसे कि राजनीति में घोटाले के रूप में
रिश्वत के रूप में
हर जगह चंदा लेने के रूप में
हर बक्त स्वार्थ के रूप में
अधिक लाभ कमाने के चक्कर में नकली माल बेचना
मिलावट करना और ,
चुनाव में जीतना एवं कुुर्सी हथियाना मनचाहा फैसला करना अधिकारियों का यह सभी भ्रष्टाचार की प्रीति में आते हैं,

"इसलिए कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार में क्या-क्या होता है यह खास बात नहीं है क्या नहीं होता है यह ही खास है|"

भ्रष्टाचार के कारण हमारे देश की परंपरा है, कि हम अपने पतन की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेते इसी प्रकार भ्रष्टाचार के कारण के पीछे हम गुलामी को मानते हैं भ्रष्टाचार के कई कारण हैं जो इस प्रकार है|
1.भ्रष्टाचार का ,मुख्य कारण है असंतोष जब किसी को कुछ अभाव होता है तो वह उसकी पूर्ति के लिए भ्रष्टाचार करता है|
2.विलासी जीवन बिताने की इच्छा के कारण भी भ्रष्टाचार पनप रहा है| सम्मान, पद, प्रतिष्ठा प्राप्त करने के कारण भी भ्रष्टाचार शिखर पर पहुंच रहा है|
3.अन्याय और निष्पक्षता के अभाव में भ्रष्टाचार का जन्म होता है|
4.सब कुछ अपने घर में भर लेने की इच्छा के कारण ही भ्रष्टाचार पनप रहा है|

                    "भ्रष्टाचार संपन्न लोगों में निर्धनों की तुलना में अधिक व्याप्त है|"

4.भ्रष्टाचार से हानि:-
                     भ्रष्टाचार से कई हानियां होती है, जो कि इस प्रकार हैं|
1.भ्रष्टाचार विकास व सुशासन का शत्रु है, जो की भ्रष्टाचार गरीबों के हक को छीनता है|
2.भ्रष्टाचार से लोगों के मन में निराशा जन्म लेती है, जिससे उनके कम करने की उर्जा खत्म होती है|
3.भ्रष्टाचार के कारण लोग नए कार्य हाथ में लेने से डरते हैं|
4.नवाचार के मार्ग में बाधा आती है, भ्रष्टाचार के कारण देश की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है, जिससे आतंकवाद की स्थिति निर्मित होती है|

5.भ्रष्टाचार के प्रभाव का परिणाम:-
                                        किसी भी देश की समृद्धि शांति, ज्ञान, संहिता की उपयोगिता दो बातों पर निर्भर करती है- 'उत्तम साधन' और 'उत्तम चरित्र' जिन देशों के पास राष्ट्रीय चरीत्र है, वह स्वतंत्र देश हैं, हमारी सरकार इतनी योजनायें चलाती है, फिर भी हम गरीब है, क्यो?

इसका कारण है- भ्रष्टाचार मे आज ही देखा जाये तो, हमारे प्रधानमंत्री 'नरेंद्र मोदी' जी के राज्य में बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है, कि जब सरकार ₹1 एक गरीब के विकास के हित में भेजती है, तो मात्र 7 पैसे का उपयोग ही उसके हित के लिए हो पाता है, शेष धन भ्रष्टाचार चाट जाता है, यह है भ्रष्टाचार की नीति आज के समय में गरीब गरीब होता जा रहा है, और अमीर अमीर होता जा रहा है, जिसमे कोई संदेह नही है,
अगर एक मंत्री उपर वेठा गरीबों के हित के लिये काम कर रहा है तो इसका क्या फायेदा, उनके निचे तो सभी नेता, कर्मचारी भ्रस्ट से भरे हुये है, जो पहले ये सोचते है, कि इस योजना के तहत हमे कितना कमीशन वचाना है, हमे कितना profit होने वाला हैं, सोचो जहा ऐंसे नेता हो वहां कुछ न्या होगा, ऐंसी उम्मीद रखने की कोई गुनजाइस ही नही हैं|
                           
6.भ्रष्टाचार से निपटने का रास्ता:-
                                      भारत की राजनीति में भ्रष्टाचार फिर एक बड़ा मुद्दा बन गया है, लेकिन हैरत की बात यह है, कि किसी के पास उसका कोई ठोस इलाज नहीं दिख रहा है, भ्रष्टाचार से निपटने का सबसे पहला रास्ता यह होना चाहिए, कि हमारी शासन व्यवस्था के चार स्तंभों का वित्तीय एवं नियमित रूप से देश के सामने पेश किया जाए और यह सिस्टम है- 'विधानसभा, कार्यपालिका, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका'; यह चारों स्तंभ अत्यंत शक्तिशाली है, इसलिए कह सकते हैं कि-
                  "जहां सकती है, वहां भ्रष्टाचार है"
                              इन सब सदस्यों की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा चुनाव के वक्त ही नहीं हर वर्ष सार्वजनिक किया जाना चाहिए|

"भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है,मेरा भारत महान 100 में से 99 बेईमान -भ्रष्टाचार भारत वासियों के खून में आ गया है|"

7.उपचार:-
         यदि हम चाहे की सरकार भ्रष्टाचार को दूर करे तो बात 7 साल तो क्या 7 जन्मों में भी नहीं कर सकती इस समस्या का वास्तविक उपचार आत्मचिंतन है, हम जब तक अपने कर्तव्य और दायित्व को नहीं समझते तव तक हर समस्या का कोई हल नहीं निकल सकता, नारे लगाना या भारत माता की जय बोलने से देश प्रेम प्रकट नहीं होता, यदि हम सच्चे देश प्रेमी है, देश से भ्रष्टाचार की जड़ उखाड़ना चाहते हैं, तो इसके लिए आवश्यक है कि कड़े कानून बनाए जाएं, दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, नागरिक अपना कर्तव्य सही समय पर कर चुका है, समाज में ईमानदार और कर्तव्य परायण सेवकों को पुरस्कृत किया जाए, पर्याप्त रोजगार के अवसर गरीबों और युवाओं को प्रदान किए जाए|

8.उपसंहार:-
          "भारतीय गणतंत्र घोटालों का गणतंत्र बन गया है, भ्रष्टाचार की गंगा ऊपर से नीचे की ओर बह रही है|"
           भ्रष्टाचार हमारे देश की स्वतंत्रता-रुपी सीता का रावण बनकर हरण कर रहा है, जब तक शक्ति सील पराक्रम से युवा सदाचारी राम नहीं बन पनपेंगे, तब तक इसका विनाश संभव नहीं है|
           यदि हम अपने इस महान राष्ट्र की प्रगति चाहते हैं, तो जीवन से भ्रष्टाचार समाप्त करना होगा| हमें दृढ़तापूर्वक भ्रष्टाचार निवारण करना होगा, सरकार को भ्रष्टाचारियों को कठोर दंड देना चाहिए, जनता को ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए, तभी हमारी भारत मां का सपना साकार हो सकेगा और हम कह सकेंगें-
            "भारत मां का एक एक सपना,
                              करना है साकार|
              दिशा-दिशा में गूंज उठी,
                              भारत मां की जय जय कार||"

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What Is Compound Microscope In Hindi:संयुक्त सूक्ष्मदर्शी क्या हैं? हिन्दी में सिखीये..

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी(Compound microscope):-
                                                                संयुक्त सूक्ष्मदर्शी एक ही अक्षर पर दो उत्तल लेंस लगे होते हैं जो लेंस वस्तु की ओर होता है, उसे अभिदृश्यक लेंस एवं जो आंख के समीप होता है, उसे अभिनेत्र लेंस कहते हैं, अभिदृश्यक लेंस का द्वारक अभिनेत्र लेंस की अपेक्षा छोटा होता है, और नेत्रिका तथा अभिदृश्यक में जितनी ही कम फोकस दूरी के लेंस का उपयोग होता है,उसकी आवर्धन क्षमता उतनी ही अधिक होती हैं|
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What Is Viscous Force in hindi:श्यान बल क्या हैं? हिन्दी में सिखीये..

श्यान बल(Viscous Force):-
                                            किसी द्रव या गैस की दो क्रमागत परतों के बीच उनकी आपेक्षिक गति का विरोध करने वाले घर्षण बल को ही श्यान बल कहते हैं,

श्यानता(Viscosity):-
                            तरल का वह गुण जिसके कारण तरल की विभिन्न परतो के मध्य आपेक्षिक गति का विरोध होता है, श्यानता कहलाती है|
गुण:-
     1.श्यानता केवल द्रव तथा गैसों का ही गुण है|
2.द्रवों में समानता अणुओं के मध्य लगने वाले संसंगक बलों के कारण होती है|
3.गैसों में श्यानता इसकी एक परत से दूसरी परत में अणुओं के स्थानांतरण के कारण होती है|
4.एक आदर्श तरल की श्यानता शून्य  होती है|
5.ताप बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घट जाती है, परंतु गैसों की श्यानता बढ़ जाती है|
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Tuesday, 5 July 2016

What Is Satellite In Hindi:(सेटेलाइट क्याहैं? हिन्दी में सीखिये.

उपग्रह( Satellite):-
                         किसी ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने वाले पिडं को उस ग्रह का उपग्रह कहते हैं|
उदाहरण के लिए जैसे चंद्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है|

उपग्रह की कक्षीय चाल( Orbital Speed of Satellite):-
                1.उपग्रह की कक्षा चाल उसकी पृथ्वी तल से ऊंचाई पर निर्भर करती है, उपग्रह पृथ्वी तल से जितना अधिक दूर होता है, उतनी ही उसकी चाल कम होती है,
2.उपग्रह की कक्षा चाल उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती है, एक ही कक्षा में भिन्न-भिन्न द्रव्यमानों के उपग्रहों की चाल समान होती है|

उपग्रह का परिक्रमण काल( Period Of Revolution Of  A Satellite):-
                                               उपग्रह अपनी कक्षा में पृथ्वी का एक चक्कर जितने समय में लगाता है, उसे उसका परिक्रमण काल कहते हैं|

परिक्रमण काल = कक्षा की परिधि/कक्षीय चाल

1.उपग्रह का परिक्रमण काल केवल उसकी पृथ्वी तल से ऊंचाई पर निर्भर करता है, एवं उपग्रह जितना अधिक दूर होता है, उतना ही अधिक उसका परिक्रमण काल होता है|
2.उपग्रह का परिक्रमण काल उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है|

भू स्थाई उपग्रह(Geo-Stationary Satellite):-
                                                                 ऐसा उपग्रह जो पृथ्वी के अक्ष के लंबवत् तल में पश्चिम से पूर्व की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है, एवं जिसका परिक्रमण काल पृथ्वी के परिक्रमण काल (24 घंटे) के बराबर होता है, इसे ही भू स्थाई उपग्रह कहते हैं|यह उपग्रह पृथ्वी तल से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहकर पृथ्वी का परिक्रमण करता है भू तुल्यकालिक कक्षा में संचार उपग्रह स्थापित करने की संभावना सबसे पहले "आर्थर थी| क्लार्क" ने व्यक्त की थी
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What is Simple Machines In Hindi(सरल मशीन क्या है ? हिन्दी मे सिखीये..

सरल मशीन( Simple Machines):-
                                                   सरल मशीन बल आघूर्ण के सिद्धांत पर कार्य करती है, जब सरल मशीन एक ऐसी युक्ति है, जिसमे किसी सुविधाजनक बिंदु पर बल लगाकर या किसी अन्य बिंदु पर रखे हुए भार को उठाया जाता है इसे ही हम सरल मशीन कहते हैं|
उदाहरण के लिए जैंसे- उत्तोलक, घिरनी, आनत तल, और स्क्रू जैक आदि|
उत्तोलक(Lever):-
                        उत्तोलक एक सीधी या टेढ़ी द्रढ़ छड़  होती है, जो किसी निश्चित बिंदु के चारों ओर स्वतंत्रता पूर्वक घूम सकती है, इसे ही उत्तोलक कहते हैं|
उत्तोलक तीन प्रकार का होता हैं,
जैसे- 1.आंलब( Fulcrum)
        2.आयास(Effort)
        3.भार(Load)
1.-आंलब:-
            जिस निश्चित बिंदु के चारों ओर उत्तोलक की छड़ स्वतंत्रता पूर्वक घूम सकती है, उसे आलब कहते हैं|
2.-आयास:-
            उत्तोलक को उपयोग में लाने के लिए उस पर जो बल लगाया जाता है, उसे ही हम आयास कहते हैं|
3.-भार:-
            उत्तोलक के द्वारा जो बोझ उठाया जाता है, एवं जो रुकावट हटाई जाती है, उसे ही हम भार कहते हैं|
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What is Centripetal Force In Hindi:अभिकेंद्रीय बल क्या हैं? हिन्दी मे सीखिये...

अभिकेंद्रीय बल(Centripetal Force):-
                                                         अभिकेंद्रीय बल जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर चलती है, तो उस पर एक बल-वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है, तब इसी बल को ही अभिकेंद्रीय बल कहते हैं, इस बल के अभाव में वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर नहीं चल सकती है, यदि कोई m द्रव्यमान का पिंड u चाल से  r त्रिज्या के व्रत्तीय मार्ग पर चल रहा है, तो उस पर कार्यकारी वृत्त के केंद्र की ओर आवश्यक अभिकेंद्रीय बल होता है|
सूत्र के माध्यम से-
                   F = mu2/r
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